2016 में नोटबंदी के दौरान एटीएम के सामने जिस प्रकार की लंबी-लंबी लाइने लगा करती थी वैसा ही नजारा सोमवार शाम इंदौर में देखा गया। कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए शहर में तीन दिन के सख्त कर्फ्यू का पहला दिन सोमवार को था। सख्ती इतनी थी कि सुबह लाेगों के घरों तक दूध-सब्जी कुछ नहीं पहुंचे। लोगों की समस्या को देखते हुए दोपहर में प्रशासन ने घोषणा करी कि शाम 5 से 7 तक पुलिस-प्रशासन के सहायोग से दूध विक्रेता लोगों को दूध बेच सकेंगे। दूध के लिए परेशान लोग तय समय से एक घंटे पहले ही दुकानों के सामने लाईन लगाकर खड़े हो गए। कई दुकानों पर दूध पहुंचा और कई पर नहीं पहुंचा। वहीं जहां पहुंचा वहां भी अधिकांश लोगों को दूध नहीं मिल सका। इस दौरान हमने कोरोनावायरस से सबसे ज्यादा प्रभावित सिलावटपुरा, छत्रीबाग, राजमोहल्ला, रानीपुरा, मालगंज आदि क्षेत्र की स्थिति को परखा। दूध के लिए घरों से निकले लोगों ने अपने मुंह पर मास्क तो लगा रखा था लेकिन सोशल डिस्टेंशिंग भूल गए थे।
समय शाम 4.45 बजे, छत्रीबाग स्थित व्यंकटेश दूध भंडार के शटर बंद थे लेकिन दुकान के बाहर महिला और पुरुषों की लाइन लगी हुई थी। कोरोना वायरस के चलते महिला और पुरुषाें ने अपने मुंह पर मास्क तो लगा रखा था लेकिन सभी काफी पास-पास खड़े थे। खाली बर्तन लिए खड़ी 65 साल की सावित्री बाई ने बताया कि घर पर दो बेटों के तीन छोटे बच्चे हैं जिन्हें प्रतिदिन दूध लगता है। सुबह तो दूध आया नहीं, अभी पता चला कि यहां मिलेगा तो लाइन में लग गई।